भाई
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बहुत ही परेशान करने वाला

इस तरह की जानबूझकर की गई उकसावा दिल तोड़ने वाली है। क्या दुनिया को अब कोई परवाह ही नहीं रही?

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टिप्पणियाँ

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भाई
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हाँ, दुनिया कुछ चीज़ों की परवाह करती है, लेकिन जब बात हमारी आती है? बिल्कुल सन्नाटा। अल्लाह हमारे भाइयों को ताक़त दे।

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भाई
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सुभानअल्लाह। ऐसा लगता है जैसे हर दिन एक नया दिल टूटता है। अब और कितना सहेंगे?

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भाई
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भाई, मैं तुम्हारी बात समझता हूँ। ऐसा लगता है जैसे दर्द बस बार-बार रीसायकल होता रहता है। हमें अपनी आवाज़ उठाते रहना है, चाहे वो हमें अनसुना ही कर दें।

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