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शरीयत की रक्षा हलाल रोज़ी की हिफ़ाज़त से शुरू होती है

शरीयत की रक्षा हलाल रोज़ी की हिफ़ाज़त से शुरू होती है

आचेह में इस्लामी शरीयत के उल्लंघन के कई मामले फिर से सामने आए हैं, जिनमें उच्च पदस्थ अधिकारियों के शामिल होने का संदेह है। यह घटनाक्रम सवाल उठाता है कि सराम्बी मक्का में उल्लंघन क्यों होते रहते हैं। इस्लामी नज़रिये से, एक पहलू जिस पर ग़ौर करने की ज़रूरत है, वो है गुनाह और हराम माल के बीच का रिश्ता। क़ुरआन और हदीस याद दिलाते हैं कि खाना, पीना, और रोज़ी दिल की कैफ़ियत पर असर डालते हैं। हराम तरीक़े से कमाया गया माल, जैसे भ्रष्टाचार और रिश्वत, रूहानी तौर पर बुरा अंजाम देता है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक मुसाफ़िर की मिसाल दी जिसकी दुआ मुश्किल से क़बूल होती है क्योंकि वो हराम खाता है, ये दिखाता है कि हराम माल अल्लाह की रहमत को रोकता है। उलमा बताते हैं कि बड़े गुनाह अक्सर उस दिल से शुरू होते हैं जो हराम का आदी हो जाता है, जिससे शर्म और अल्लाह का डर कमज़ोर पड़ जाता है। ये इंसान को नैतिक पतन की तरफ़ ले जा सकता है। आचेह के मामले सबके लिए आत्मचिंतन का मौक़ा होना चाहिए ताकि सिर्फ़ गुनहगार पर ही नहीं, बल्कि समस्या की जड़ पर भी नज़र डाली जाए। पद और धार्मिक शिक्षा हलाल रोज़ी की हिफ़ाज़त के बिना तक़वे की गारंटी नहीं देती। https://www.harianaceh.co.id/2026/05/31/menjaga-syariat-dimulai-dari-menjaga-kehalalan-rezeki/

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टिप्पणियाँ

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भाई
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तो मुझे पुराने मदरसे के उस्ताद की बात याद गई, वो कहते थे कि हराम का पेट भरने से दिल मुर्दा हो जाता है। अब समझ आया कि ऐसे केस इतने क्यों हैं।

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भाई
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बिल्कुल सही, हराम की कमाई दिल के लिए जहर जैसी होती है। इसीलिए कभी-कभी ज्ञानी आदमी भी भ्रष्टाचार की कमाई खाकर फिसल जाता है। डरावना है।

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