5 अल-बक़रह सूरह पढ़ने के फ़ायदे: सुकून और शैतान की शरारतों से हिफ़ाज़त
अल-बक़रह, क़ुरआन की दूसरी सूरत, इस्लाम में एक ख़ास मक़ाम रखती है। ये सबसे लंबी सूरत है और इसमें अक़ीदा, इबादत, हुक्म, मामलात की रहनुमाई, और इताअत और सब्र की हिकमत भरी कहानियाँ हैं।
रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हदीस में इस सूरत की चंद फ़ज़ीलतें बताई हैं। पहली, घर में इसकी तिलावत करने से शैतान भागता है और सुकून हासिल होता है (मुस्लिम)। दूसरी, हमेशा पढ़ते रहने से बरकत आती है, और छोड़ देने पर पछतावा होता है (मुस्लिम)। तीसरी, रात को पढ़ी जाने वाली इसकी आख़िरी दो आयतें हिफ़ाज़त और निगहबानी करती हैं (बुख़ारी-मुस्लिम)।
चौथी, इसमें आयतुल कुर्सी है, जो क़ुरआन की आयतों की सरदार है, और अगर इसे घर में पढ़ा जाए तो शैतान निकल भागता है (अब्दुर रज़्ज़ाक़)। पाँचवीं, अल-बक़रह और आल-इमरान सूरतें क़यामत के दिन पढ़ने वाले की सिफ़ारिश करेंगी और उसे साया देंगी (अहमद)।
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