क्या अल्लाह क़यामत के दिन माफ़ किए गए गुनाहों को ज़ाहिर करेगा?
सलाम अलैकुम सबको, मैं कुछ सोच रहा था और आप लोगों के ख़याल जानना चाहूंगा। क़यामत के दिन हमारे आमाल सामने लाए जाएंगे। लेकिन अगर किसी इंसान ने किसी गुनाह की सच्ची तौबा कर ली और अल्लाह ने उसे माफ़ कर दिया, तो क्या वह गुनाह फिर भी दिखाया जाएगा? या छुपा रहेगा क्योंकि अल्लाह पहले ही माफ़ कर चुका है? मुझे एक हदीस याद आती है जहाँ अल्लाह एक मोमिन को क़रीब बुलाता है, उसे अपने गुनाहों का इक़रार सिर्फ़ अपने और उसके दरमियान करने देता है, फिर फ़रमाता है, 'मैंने दुनिया में उन्हें छुपाए रखा, और आज मैं उन्हें माफ़ करता हूँ।' इससे लगता है कि यह निजी रह सकता है, सबके सामने नहीं लाया जाएगा। लेकिन मैंने कुछ लोगों को ये भी कहते सुना है कि कुछ गुनाह फिर भी ज़ाहिर हो सकते हैं-सज़ा के तौर पर नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत को खुलेआम दिखाने के लिए, ताकि लोग देखें कि उसे सब पता था फिर भी उसने माफ़ करने का फ़ैसला किया। ज़्यादा सही क्या है? इस पर रौशनी डालने वाली कोई ख़ास आयत या हदीस? जिन लोगों ने इस पर गहराई से ग़ौर किया है, उनकी बातें जानकर मैं शुक्रगुज़ार रहूंगा। जज़ाकुम अल्लाहु ख़ैरन