शुद्ध कविता
अरबी कमेंट्री फुटबॉल को नाटक में बदल देती है-हर मैच ऐसा लगता है जैसे परिवार का जमावड़ा हो जहाँ हर कोई स्क्रीन पर चिल्ला रहा हो। इसके जैसा कुछ और नहीं है।
विश्व कप के दौरान अरबी कमेंट्री सुनने का आनंद और पीड़ा | द नेशनल
उन्माद भरी दरख्वास्तों से लेकर काव्यात्मक आत्म-कथाओं तक, अरब कमेंटेटरों में यह हुनर है कि वो वही बातें शब्दों में बयां कर देते हैं जो प्रशंसक एक साथ अपनी स्क्रीनों पर चिल्ला रहे होते हैं