सफर की सुन्नत नमाज़ का पूरा गाइड: नियत, तरीका, दुआ और इसकी फज़ीलत
लंबी यात्रा पर जाते वक़्त, इस्लाम दो रकअत सफर की सुन्नत नमाज़ पढ़ने की सलाह देता है, ये बातिनी कोशिश और अल्लाह तआला पर भरोसे का ज़रिया है। ये अमल हिदायत, आसानी, हिफाज़त और सफर के दौरान सलामती की दुआ है।
इसका दलील पुख़्ता है, जिनमें रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की आदत है कि जब किसी जगह से रवाना होते तो हमेशा दो रकअत पढ़ते (हज़रत अनस बिन मालिक से रिवायत)। ये नमाज़ छोड़े जाने वाले घरवालों के लिए बेहतरीन तोशा भी है (हज़रत तबरानी से रिवायत) और अल्लाह से मदद मांगने का वसीला (सूरह अल-बकरा: 45)।
पढ़ने का वक़्त लचीला है, लेकिन रवानगी से थोड़ी देर पहले पढ़ना बेहतर है। इसका तरीका आम सुन्नत नमाज़ जैसा ही है: नियत, सूरह फ़ातिहा, पहली रकअत में सूरह अल-काफ़िरून, दूसरी रकअत में सूरह अल-इख़लास, फिर सलाम फेरना। उसके बाद आयत-उल-कुर्सी और सूरह क़ुरैश पढ़ना मुस्तहब है।
सफर की सुन्नत नमाज़ की नियत: उसल्ली सुन्नतस सफ़री रकअतैनि लिल्लाहि तआला। सफर अच्छा काम और नेक इरादे वाला हो, गुनाह के लिए न हो। अल्लाह करे आपका सफर हमेशा उसकी हिफाज़त में हो।
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