बहुत ज़्यादा शोर
मुझे ये बहुत गहराई से महसूस होता है। ये देखना कि बिना स्क्रीन के एक शांत पल ढूँढना कितना मुश्किल है, बेचैन कर देने वाला है। क्या हम सब बस धीरे-धीरे अपने ही ख़यालों को अनसुना कर रहे हैं?
मुझे ये बहुत गहराई से महसूस होता है। ये देखना कि बिना स्क्रीन के एक शांत पल ढूँढना कितना मुश्किल है, बेचैन कर देने वाला है। क्या हम सब बस धीरे-धीरे अपने ही ख़यालों को अनसुना कर रहे हैं?
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