मुबारक अरफ़ा का दिन 🌙
अरफ़ा का दिन इस्लाम में बहुत ही मुक़द्दस दिन है, जो ज़िलहिज्जा की 9 तारीख़ को आता है, ईद-उल-अज़हा से ठीक पहले। हमारे प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने बताया कि इस दिन का रोज़ा पिछले साल और आने वाले साल के गुनाहों को मिटा देता है। तो ये हैं इस ख़ास दिन पढ़ने के लिए 10 ख़ूबसूरत दुआएँ 🤍 1. **मग़फ़िरत की दुआ** اللهم إنك عفو تحب العفو فاعف عني अल्लाहुम्म इन्नका ‘अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल ‘अफ़्वा फ़’अफ़ू ‘अन्नी (ऐ अल्लाह, तू बहुत माफ़ करने वाला है और माफ़ी को पसंद करता है, तो मुझे माफ़ फ़रमा।) 2. **दुनिया और आख़िरत की भलाई की दुआ** ربنا آتنا في الدنيا حسنة وفي الآخرة حسنة وقنا عذاب النار रब्बना आतिना फ़िद्दुनिया ह़सनतन व फ़िल आख़िरति ह़सनतन व क़िना ‘अज़ाबन्नार (ऐ हमारे रब, हमें दुनिया में भी भलाई दे और आख़िरत में भी भलाई दे और हमें जहन्नम के अज़ाब से बचा।) 3. **साबित क़दम रहने की दुआ** يا مقلب القلوب ثبت قلبي على دينك या मुक़ल्लिबल-क़ुलूब सब्बित क़ल्बी ‘अला दीनिक (ऐ दिलों को फेरने वाले, मेरे दिल को अपने दीन पर साबित रख।) 4. **वालिदैन और मोमिनों के लिए दुआ** اللهم اغفر لي ولوالدي وللمؤمنين يوم يقوم الحساب अल्लाहुम्मग़्फ़िर ली व लिवालिदय्या व लिल-मु’मिनीना यौम यक़ूमुल ह़िसाब (ऐ अल्लाह, हिसाब के दिन मुझे, मेरे माँ-बाप और तमाम मोमिनों को बख़्श दे।) 5. **अल्लाह पर भरोसा रखने की दुआ** حسبي الله لا إله إلا هو عليه توكلت وهو رب العرش العظيم हस्बियल्लाहु ला इलाहा इल्ला हुआ ‘अलैहि तवक्कल्तु व हुआ रब्बुल-‘अर्शिल-‘अज़ीम (अल्लाह मेरे लिए काफ़ी है, उसके सिवा कोई माबूद नहीं। मैंने उसी पर भरोसा किया और वही अज़ीम अर्श का मालिक है।) 6. **दिली सुकून की दुआ** اللهم ارزقني راحة البال وطمأنينة القلب अल्लाहुम्मरज़ुक़्नी राह़तल-बाल व तुम’नीनत-अलक़ल्ब (ऐ अल्लाह, मुझे दिमाग़ी सुकून और दिल की इत्मीनान अता फ़रमा।) 7. **रहमत और मग़फ़िरत की दुआ** رب اغفر وارحم وأنت خير الراحمين रब्बिग़्फ़िर वरहम व अन्त खैरुर-राह़िमीन (ऐ मेरे रब, बख़्श दे और रहम फ़रमा, तू ही सबसे बेहतर रहम करने वाला है।) 8. **हिदायत और कामयाबी की दुआ** اللهم اهدني واصلحني ووفقني अल्लाहुम्म इहदिनी व अस्लिह्नी व वफ़्फ़िक़्नी (ऐ अल्लाह, मुझे हिदायत दे, मेरी इस्लाह कर और मुझे कामयाबी अता फ़रमा।) 9. **अरफ़ा के दिन का ज़िक्र** لا إله إلا الله وحده لا شريك له، له الملك وله الحمد وهو على كل شيء قدير ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लह, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्द व हुआ ‘अला कुल्लि शै’इन क़दीर (अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वो अकेला है, उसका कोई साझी नहीं। बादशाही उसी की है और तारीफ़ भी उसी के लिए है, और वो हर चीज़ पर क़ादिर है।) 10. **जहन्नम से आज़ादी की दुआ** اللهم اجعلنا من عتقائك من النار अल्लाहुम्मज‘अलना मिन ‘उतक़ा’इक मिनन्नार (ऐ अल्लाह, हमें जहन्नम से आज़ाद करने वालों में शामिल फ़रमा।) अल्लाह हमारे रोज़ों और दुआओं को इस मुबारक दिन पर क़ुबूल फ़रमाए। वो हमारे गुनाहों को बख़्श दे, हमारे दिलों में सुकून अता करे, और हमें दुनिया और आख़िरत की भलाई नसीब फ़रमाए। आमीन 🤍 मुझे भी अपनी दुआओं में याद रखिएगा। 🌙