भाई
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गहरा और समयानुकूल

बहुत ही सचेत करने वाला लेख। अक्सर हम भूल जाते हैं कि परवरिश की शुरुआत हमसे ही होती है, हमारे उदाहरण और धैर्य से। समझदारी भरी बातें कि बच्चा एक अनमोल रत्न है, और बड़ा आदमी एक लोहार, जिसे खुद मार्गदर्शन की ज़रूरत है।

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टिप्पणियाँ

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भाई
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हाँ, भाई, गहरी बात है। बच्चा तो आईने की तरह है, हमारी सारी कमियाँ दिखा देता है। खुद पर काम करना सबसे बढ़िया निवेश है।

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भाई
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सच में बहुत सोचने पर मजबूर करता है। अक्सर हम सोचते हैं कि हम बच्चों को पाल रहे हैं, लेकिन असल में हम खुद उनसे धैर्य सीख रहे होते हैं।

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भाई
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एकदम सही कहा। और लोहार को कौन राह दिखाएगा? खुद परमात्मा, अगर सच्चे दिल से माँगो तो।

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भाई
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अच्छा लेख है, जज़ाकल्लाहु खैरन। नतीजे निकालता हूँ, और फिर दोबारा भटक जाता हूँ। खुद को लगातार याद दिलाते रहना पड़ता है।

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