तुम ही क्यों?
तुम सोचते हो, "मैं ही क्यों?" तुम! क्योंकि अल्लाह चाहता है कि तुम्हारे गालों पर बहने वाले हर आंसू से तुम्हारे गुनाह धुल जाएं। क्योंकि वो चाहता है कि जब भी तुम दुआ में हाथ उठाओ, तुम्हारे नाम-ए-आमाल में नेकियाँ भर जाएं। क्योंकि वो तुम्हारा जन्नत में दर्जा बुलंद करना चाहता है, उस हर सब्र के लम्हे से जिसे तुम मुश्किल से थामे रहते हो, जबकि दिल दुख रहा हो। क्योंकि वो तुम्हें थोड़ी सी उदासी से आज़माकर अनंत खुशी देना चाहता है। क्योंकि अल्लाह तुम्हारी परवाह करता है।