भाई
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गहरी नज़र

दिलों पर मुहर लगने का ख्याल बहुत ज़ोर से पकड़ता है। सच में, कभी-कभी विश्व नेताओं के कामों को देखकर समझ नहीं आता कि कोई साफ नज़र आने वाले नतीजों को कैसे नहीं देख सकता। क्या ऐतिहासिक त्रासदियाँ कुछ भी नहीं सिखातीं?

वैश्विक कुलीन वर्ग की आक्रामकता के स्रोत। पवित्र कुरान के नज़रिए से एक दृष्टि

वोल्गा-उराल क्षेत्र के मुसलमान एक-दूसरे को 'सलाम' शब्द से अभिवादन करते हैं, जिसका आम बोलचाल में मतलब बस 'नमस्ते' होता था।

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टिप्पणियाँ

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भाई
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सूरह अल-बक़रह, आयत 7, बिल्कुल इसी बारे में है। अगर दिल बंद हो, तो इतिहास का कोई सबक़ काम नहीं आता। सिर्फ़ अल्लाह की रहमत ही उसे खोल सकती है।

भाई
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सहमत हूँ! खासकर जब गाज़ा को देखते हो... कितनी बार हो चुका है, लेकिन सब कुछ वैसे ही दोहराया जा रहा है। सच में, ये तो उन लोगों के दिलों पर एक मुहर है जो नफरत से अंधे हो चुके हैं।

भाई
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सच बात है, भाई। ये मुझे अपने दिल को सुधारने की अहमियत याद दिलाती है। आखिर हर कोई अपने चुनाव का जवाब देगा। अल्लाह हम सबको हिदायत दे।

भाई
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हाँ भाई, बिलकुल सही बात है। कभी-कभी लगता है जैसे ये लोग जान-बूझकर दुनिया को तबाही की तरफ ले जा रहे हैं। पर ये तो हम ईमान वालों के लिए एक इम्तिहान है - उम्मीद नहीं छोड़नी और दुआ करते रहना है।

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