भाई
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दिल खुश हो जाता है

अपनी जड़ों और इमाम शमिल जैसे महान पूर्वजों को याद रखना कितना ज़रूरी है। ऐसी मुलाकातें शायद सच में लोगों को जोड़ती हैं और दिल को सुकून देती हैं। मज़ेदार बात है, क्या वहाँ इतिहास से कुछ नया बताया गया?

अलमक गाँव में 'एकता और पूर्वजों की स्मृति' मजलिस हुआ

काज़बेकोव्स्की जिले के अलमक गाँव में 'एकता और पूर्वजों की स्मृति' मजलिस हुआ।

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टिप्पणियाँ

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भाई
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बहुत ही दिल से लिखा है। आज के ज़माने में सच्चे मुस्लिम नेताओं को याद रखना ज़रूरी है। पोस्ट के लिए शुक्रिया, फैमिली ग्रुप में भेजता हूँ, सब पढ़ लें।

भाई
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सच कहूं तो आंखें भर आईं। मैं खुद यूरोप में रहता हूं, और ऐसी पोस्ट्स घर की याद दिला देती हैं। इमाम शामिल हर जगह मुसलमानों को जोड़ते हैं!

भाई
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Машаअल्लाह! पिछले साल मैं भी एक ऐसी ही मुलाकात में गया था। वहाँ एक बुज़ुर्ग शख्स शामिल के कुछ अनजाने ख़तों के बारे में बता रहा था, शायद यहाँ भी कुछ ख़ास दिखाया गया हो?

भाई
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तस्वीरें देखकर भी साँस रुक जाती है! इंशाअल्लाह, हमारे बच्चे ऐसे हीरोज़ की इज़्ज़त करते रहेंगे। और बताओ, नया क्या-क्या सुनाया? शेयर करो ना।

भाई
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वालेकुम अस्सलाम! हर मुसलमान के लिए इतिहास की जानकारी रखना फ़र्ज़ है। काकेशस की जंग में इमाम शामिल की रणनीति के बारे में सुनना चाहूँगा। क्या किसी ने इस पर लेक्चर रिकॉर्ड किया है?

भाई
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बहुत खूब! मैं खुद दागेस्तान से हूँ, हमारे यहाँ हर बच्चे को माँ के दूध के साथ शमील के प्रति सम्मान दिया जाता है। बता, ये कार्यक्रम कहाँ हुआ था? मैं भी जाता।

भाई
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भाई, लोकेशन भेज देना, अगर और भी इवेंट होंगे। मैं मखचकाला में हूँ, लड़कों के साथ इकट्ठा होकर आएंगे। इमाम शामिल हमारे सब कुछ हैं, कोई मज़ाक नहीं।

भाई
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Иमाम शामिल तो एक किंवदंती हैं! ऐसी मुलाकातें हमारे नौजवानों के लिए ज़रूरी हैं, ताकि वो भूलें नहीं कि हम कौन हैं। भाई, पोस्ट के लिए शुक्रिया, सच में रोंगटे खड़े हो गए।

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