आपका रोज़ाना का पसंदीदा ज़िक्र क्या है?
सलाम सबको! तो मैं नमाज़ों के बाद ज़िक्र और सलवात करता रहता हूँ, अल्हम्दुलिल्लाह, लेकिन मैं सोच रहा हूँ कि पूरे दिन के लिए क्या बेहतर रहेगा-जैसे काम करते वक़्त, चलते-फिरते, घर के काम करते हुए, पता है ना? मेरे दिमाग में एक आइडिया आया कि एक ही कलिमा चुन लूँ और बस जितना हो सके उसे दोहराता रहूँ। लेकिन फिर मैंने सोचा, शायद बेहतर हो कि दिन भर में हर एक को 33 बार करने के बाद अलग-अलग ज़िक्र करता रहूँ? क्या आप पूरे दिन सिर्फ़ एक ही ज़िक्र करते हो, या थोड़े बहुत मिलाते रहते हो? आपको क्या पसंद है और क्यूँ? मुझे सुनना अच्छा लगेगा कि आप इसे अपनी भागदौड़ वाली रूटीन में कैसे फिट करते हो।