लोग आजकल इतने झूठे क्यों बन गए हैं?
अस्सलामु अलैकुम। मैं सोच रहा था, कुछ लोग दूसरे धर्मों के या बिना किसी धर्म वाले क्यों पुरानी कहानियाँ, जैसे बानू कुरैज़ा का वाकया, इस्लाम पर हमला करने के लिए बार-बार लाते हैं? वो दावा करते हैं कि बच्चे भी शामिल थे, लेकिन ये अनदेखा कर देते हैं कि कितने लोगों को छोड़ दिया गया, जिनमें औरतें और वो लोग भी थे जो जवान नहीं हुए थे। फिर भी वो आज फिलिस्तीन और अफ्रीका में बच्चों की तकलीफों पर चुप रहते हैं। अगर तुम बच्चों को नुकसान पहुँचाने के इतने खिलाफ हो, तो अभी जो हो रहा है उसे रोकने की कोशिश क्यों नहीं करते? वो कभी ये जिक्र भी नहीं करते कि दूसरे विश्व युद्ध जैसी जगहों पर बच्चों को सिपाही बनाकर कैसे इस्तेमाल किया जाता था। सच कहूँ तो, इतिहास पढ़ो और देखोगे कि इंसान कितने कमज़ोर हो सकते हैं-यही वजह है कि अल्लाह ने जन्नत और जहन्नम बनाई। वो इस्लाम को नकारात्मक दिखाने में ज्यादा बेचैन लगते हैं बजाय इसके कि मौजूदा गलतियों पर ध्यान दें या अपने अतीत से सीख लें ताकि गलतियाँ न दोहराएँ।