धुल हिज्जा के पहले दस दिन कोई आम दिन नहीं हैं। ये दिन खुद अल्लाह ने चुने हैं। जब तुम्हारा दिल सुन्न हो तब भी नमाज़ पढ़ो। जब तुम खुद को नालायक समझो तब भी दुआ करो। बार-बार उन्हीं गुनाहों में लौटो तब भी तौबा करो। तुम्हारी आवाज़ काँपे तब भी अल्लाह के सामने रोओ। उससे सब कुछ माँगो, नामुमकिन भी।
अस्सलामु अलैकुम, प्यारे भाइयों और बहनों। मैं बस तुम्हें-और खुद को-याद दिलाना चाहती हूँ कि धुल हिज्जा के ये पहले दस दिन किसी और दिनों जैसे नहीं हैं। अल्लाह ने खुद इन्हें चुना, बरकत दी, और साल के बाकी सब वक्तों से ज़्यादा इनसे मुहब्बत की। कितने ही लोग इन दस दिनों में ऐसे दाख़िल हुए जो गुनाहों के बोझ तले दबे थे, सोचते थे कभी मिटाए नहीं जा सकते, और वो पूरी तरह बदल कर निकले। कुछ टूटे हुए आए और मुकम्मल होकर गए। कुछ धरती पर गुमनाम आए और उनके नाम फ़रिश्तों में मशहूर हो गए। प्लीज़, इन दिनों को बस ऐसे ही गुज़रने मत दो जैसे कोई आम हफ़्ता। नमाज़ पढ़ो, चाहे अंदर से ख़ाली क्यों न महसूस हो। दुआ करो, चाहे लगे कि तुम इसके लायक नहीं। तौबा करो, चाहे तुम्हीं गुनाहों में बार-बार गिरते रहो। अल्लाह के आगे रोओ, चाहे आवाज़ लरज़ती हो। उससे वो सब माँगो-जो नामुमकिन है, जो छुपा है, जो दुख देता है, जो तुमने दिल में गहरे दफ़न कर रखा है। ये वो दिन हैं जब क़िस्मतें पलट सकती हैं। कभी शक मत करो कि अल्लाह सिर्फ़ दस दिनों में क्या बदल सकता है। एक सच्ची दुआ तुम्हारा पूरा रास्ता हमेशा के लिए बदल सकती है। अल्लाह के डर और मुहब्बत का एक आँसू गुनाहों के पहाड़ धो सकता है। उसकी तरफ़ लौटने का एक पल वो चाबी बन सकता है जिससे अल्लाह वो दरवाज़े खोल दे जो तुम्हें हमेशा के लिए बंद लगते थे। दिल से किया हुआ एक सज्दा तुम्हारी पूरी कहानी दोबारा लिख सकता है। रात के सन्नाटे में धीरे से माँगी एक दुआ ऐसे दरवाज़े खोल सकती है जिनसे तुम उम्मीद खो चुके थे। तो आओ इन बरकत वाले दिनों को कसकर पकड़ें: – ज़्यादा रकअतें पढ़ो – क़ुरआन की तिलावत करो – हो सके तो रोज़ा रखो – सदक़ा दो – अपनी ज़बान को ज़िक्र से तर रखो – अल्लाह से जन्नत की मिन्नतें करो – शिफ़ा माँगो – मुहब्बत माँगो – हिदायत माँगो – वो ज़िंदगी माँगो जो तुम्हारा दिल गहराई से चाहता है और कभी ये मत सोचना कि तुम्हारी दुआ अल्लाह के लिए बहुत छोटी है। ये दुनिया हमेशा नहीं रहेगी। मगर ये दस दिन? ये एक ऐसा मौक़ा है जिसे कितने ही लोग बस एक बार और पाने की तमन्ना करते हैं। इन्हें बर्बाद मत करो। या अल्लाह, हमें धुल हिज्जा के दस दिन सच्चे दिलों के साथ गुज़ारने की तौफ़ीक़ दे, हमारी हर दुआ क़ुबूल कर, हमारे छुपाए गुनाहों को बख़्श दे, हमारे सीने के ज़ख़्मों को भर दे, और हमारे नाम जन्नतुल-फ़िरदौस वालों में लिख दे। आमीन।