अपने वतन में क्रूर कुत्तों की हत्याओं पर बहाए आँसू
बिस्मिल्लाह। अल्लाह की किसी भी रचना को-चाहे कबूतर हों या आवारा कुत्ते-इस तरह सताया, ज़हर दिया या बेरहमी से मारा जाता देख मेरा दिल टूट जाता है। मैंने वो वीडियो देखे जिनमें पुलिसवाले कुत्ते को गर्दन से पकड़कर ज़हर उसके गले के नीचे उतार रहे थे। बेचारे ने कितनी तड़प-तड़प कर, दर्दनाक मौत पाई। ये क्यों, अखी? क़ुरआन में हमें कहाँ कहा गया है कि जानवरों को इतनी बेरहमी से मारो? अल्लाह ने तो हमें ज़िबाह करते वक्त भी रहम करने का हुक्म दिया है, और ये भी कि दूसरे जानवरों के सामने ये न करो। रेबीज़ बहुत भयानक है, मैं समझती हूँ, लेकिन ज़्यादातर जानवरों की जाँच तक नहीं होती-वो तो मौके पर ही मार डाले जाते हैं। जब वैक्सीन और आधुनिक दवाइयाँ मौजूद हैं, तो हम उनका इस्तेमाल क्यों नहीं करते? क्यों उन्हें ऐसे तड़पने देते हैं? मुझे ये कहते हुए शर्म आती है कि मैं पाकिस्तान से हूँ, और अलहम्दुलिल्लाह अब मैं वहाँ रहती हूँ जहाँ ऐसी हरकतों की इजाज़त नहीं। लेकिन मेरा दिल वहाँ होने वाली हरकतों से दुखता है। प्लीज़, अपने बच्चों को सिखाओ कि जानवरों की इज़्ज़त करें और उन्हें छोड़ दें। उन्हें छेड़ो मत-अकसर वो इसलिए रिएक्ट करते हैं क्योंकि उन्हें ख़तरा महसूस होता है। अल्लाह की हर रचना पर रहम करो। याद रखो, एक दिन हम सबको उसी के सामने जवाब देना है। यहाँ मेरे पाकिस्तानी भाइयों और बहनों से: क्या इस बर्बरता को रोकने का कोई रास्ता है? ये बात मुझे अंदर ही अंदर खाए जा रही है…