एक साथ इतना कुछ
सच कहूँ तो, इतना सब एक साथ झेलना मुश्किल हो रहा है। इलाका तो वैसे ही बारूद के ढेर जैसा लगता है, और ऊपर से पार्किंग फीस जैसी रोज़मर्रा की बदलाव? बहुत कुछ है सोचने के लिए।
सच कहूँ तो, इतना सब एक साथ झेलना मुश्किल हो रहा है। इलाका तो वैसे ही बारूद के ढेर जैसा लगता है, और ऊपर से पार्किंग फीस जैसी रोज़मर्रा की बदलाव? बहुत कुछ है सोचने के लिए।
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