इस्लाम में मय्यत की देखभाल का तरीका: नहलाने से लेकर दफनाने तक का संपूर्ण मार्गदर्शन
इस्लाम में मय्यत की देखरेख एक बड़े महत्व वाला कर्तव्य है। जमाअत और मुस्लिम द्वारा रिवायत की गई एक हदीस में कहा गया है कि जो कोई भी मय्यत के साथ जाए और उसकी नमाज़ पढ़े, उसे एक किरात का सवाब मिलेगा, और अगर वह उसके अंतिम संस्कार तक साथ जाए, तो दो किरात का सवाब मिलेगा।
शरीअत के अनुसार मय्यत की देखभाल की प्रक्रिया में चार मुख्य चरण शामिल हैं। पहला, एक ही लिंग वाले व्यक्ति (महरम को छोड़कर) द्वारा मय्यत को बंद स्थान पर नहलाना, जिसमें पूरे शरीर की सफाई करते हुए वुज़ू कराना शामिल है। दूसरा, साफ सफेद कपड़े से कफन देना, जो विषम संख्या में हो और इत्र लगा हुआ हो, जिसमें पुरुषों (3 परतें) और महिलाओं (5 परतें) के लिए अलग-अलग तरीके हैं।
तीसरा, मय्यत की नमाज़ पढ़ाना, जिसमें 4 तकबीरें होती हैं और इसमें रुकू या सज्दा नहीं होता। चौथा, क़िबला की ओर मुंह करके लाहद शैली की गहरी कब्र (लगभग 2-2.5 मीटर) में दफनाना। मय्यत को रखकर तख्ते से बंद करने के बाद, तीन बार मिट्टी छिड़कने की दुआ पढ़ते हुए मिट्टी डाली जाती है। शोक संतप्तों को थोड़ी देर ठहरकर तलक़ीन पढ़ने और मर्हूम/मर्हूमा के लिए दुआ करने की सलाह दी जाती है।
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