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लेबक में एनयू चावल की पहली फसल, खाद्य सुरक्षा के लिए बायोन्यूट्रिएंट तकनीक का इस्तेमाल

नहदलातुल उलमा (एनयू) चावल की पहली फसल सोमवार (6/7/2026) को बांतेन के लेबक जिले के सुकामाना गांव में हुई। एग्रीकल्चर सर्कुलर इकोनॉमी जोन-एनयू (एसीईजेड-एनयू) कार्यक्रम में आधुनिक कृषि तकनीक, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, और समुदाय-आधारित किसान सशक्तीकरण को जोड़ा गया है। इस पहल में लकपेसदम पीबीएनयू, एलपीपी पीबीएनयू, पीडब्ल्यूएनयू, पीसीएनयू, किसान समूह, स्थानीय सरकार और ताइवान की रेडियंस एग्रीटेक इंक शामिल हैं। पीबीएनयू के अध्यक्ष केएच अहमद सुएदी ने इस फसल को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में एनयू का ठोस योगदान बताया। उन्होंने वैज्ञानिक कृषि तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया, जिसमें बायोन्यूट्रिएंट उर्वरक शामिल है, और उम्मीद जताई कि रेडियंस एग्रीटेक के साथ सहयोग से इसे व्यापक रूप से उत्पादित किया जा सकेगा। लकपेसदम पीबीएनयू के कार्यकारी निदेशक असरुल रमन ने बताया कि 840 वर्ग मीटर के खेत में उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। बायोन्यूट्रिएंट तकनीक से केवल उत्पादकता बढ़ी, बल्कि कीटों का हमला भी घटा और मिट्टी की हालत सुधरी। एलपीपी पीबीएनयू के सचिव चंद्रा अप्रियांतो ने रासायनिक उर्वरकों से घटी उर्वरता को दूर करने के लिए मिट्टी के पोषक तत्वों की बहाली को अहम कदम बताया। रेडियंस एग्रीटेक इंक के सीईओ माइकल कुओ ने पीबीएनयू के साथ बायोन्यूट्रिएंट उर्वरक बनाने के लिए प्रतिबद्धता जताई। वहीं, लेबक जिला कृषि उत्पादन प्रमुख दोदी हरमावन ने इस नवाचार की सराहना करते हुए इसे किसानों की भलाई और खाद्य सुरक्षा बढ़ाने में मददगार बताया। एसीईजेड-एनयू मॉडल को सहयोग-आधारित टिकाऊ कृषि का उदाहरण बनने की उम्मीद है। https://mozaik.inilah.com/news/panen-perdana-beras-nu-dengan-teknologi-bionutrient-jadi-model-ketahanan-pangan-baru

टिप्पणियाँ

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भाई
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बहुत बढ़िया, NU आगे बढ़ता रहे। यह बायोन्यूट्रिएंट खाद हमारे किसानों के लिए एक समाधान बन सकती है जिनकी ज़मीन रसायनों से थक चुकी है।

भाई
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अल्हम्दुलिल्लाह, उम्मीद है ताइवान के साथ ये सहयोग यूं ही चलता रहे। कृषि तकनीकें तो अपनानी ही पड़ेंगी, वरना पीछे छूट जाएंगे।

भाई
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PBNU और इसमें शामिल सब लोगों को सलाम। इस तरह की टिकाऊ खेती ही तो हमें चाहिए, बस पल भर के उत्पादन के पीछे नहीं भागना।

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