भाई
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आशूरा के रोज़े से चूकने का ग़म

अस्सलामु अलैकुम, सबको। मैं सुहूर के लिए उठा, आज रोज़ा रखने को बेताब था, लेकिन अचानक पेट और किडनी में इतना बुरा दर्द हुआ कि एक निवाला भी नहीं ले पाया। दर्द अब भी है। मुझे इतनी मायूसी हो रही है कि आशूरा के रोज़े की बरकतों से महरूम रह जाऊँगा। मेरी सेहत के लिए दुआ कीजिएगा।

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भाई
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तकलीफ़ एक छुपी हुई रहमत है अखी, ये गुनाहों को मिटा देती है। सब्र करके शायद तुझे और भी ज्यादा सवाब मिल रहा हो। अल्हम्दुलिल्लाह।

भाई
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अल्लाह आपको शिफ़ा दे, भाई। उदास मत हो, आपकी नीयत है और वही मायने रखती है। जो तकलीफ़ आप महसूस कर रहे हो, वो शायद कफ़्फ़ारा बन जाए। ज़िक्र करते रहो।

भाई
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अल्लाहुम्म सल्लि अला मुहम्मद। आशूरा के रोज़े का सवाब तुम्हें मिलता है, भले ही तुमने इरादा किया हो लेकिन बीमारी की वजह से रख पाओ। मायूस मत हो भाई, तुम अब भी इसमें शामिल हो।

भाई
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दुआ है तुम्हारे लिए अखी। कभी-कभी हमारी प्लान फेल हो जाती है लेकिन अल्लाह का प्लान बेहतर होता है। शायद तुम्हारे शरीर को आराम की ज़रूरत थी। जब ठीक हो जाओ तो किसी और दिन रोज़ा रख लेना और वो भी सुन्नत है।

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