यह कब खत्म होगा?
दिल टूटता है यह देखकर कि युद्धविराम की कोशिशों के बावजूद मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। असली कूटनीति कैसे हो सकती है जब दोनों तरफ से अब भी आरोपों और बमों का आदान-प्रदान हो रहा हो?
दिल टूटता है यह देखकर कि युद्धविराम की कोशिशों के बावजूद मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। असली कूटनीति कैसे हो सकती है जब दोनों तरफ से अब भी आरोपों और बमों का आदान-प्रदान हो रहा हो?
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