जो लोग रमज़ान में रोज़ा नहीं रख सकते, उन्हें क्या करना चाहिए?
बिल्कुल सही समय पर याद दिलाया कि जो लोग वाजिब वजहों से (बीमारी, बुढ़ापा, भारी काम) रमज़ान के रोज़े नहीं रख सकते, उनके लिए भी इनाम है! अल्लाह की रहमत से, अगर उनका इरादा सच्चा है, तो उन्हें वही सवाब लिखा जाता है जैसे वे तंदुरुस्त रहते हुए अदा करते। सबसे अहम बात यह है कि तंदुरुस्ती और जवानी का वक्त जब तक है, उसे बेकार मत गंवाओ। और जो लोग बीमार हैं और शिफा की उम्मीद नहीं रखते, उन्हें फिद्या अदा करनी चाहिए। उदास मत हो और परवरदिगार की रहमत पर भरोसा रखो! 🤲
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