अपनी आध्यात्मिक रीसेट शुरू करें: 1,000 इस्तिग़फ़ार चैलेंज
नमस्कार दोस्तों! आइए, एकदम सच बात करें-कई बार हमें जिस चीज़ की कमी महसूस होती है, वो और ज़्यादा प्रेरणा नहीं, बल्कि हमारी आत्मा की एक गहरी सफाई होती है। हम सभी के साथ ऐसे पल आते हैं: जब ठहराव महसूस हो, रहमतों का इंतज़ार हो, बेचैनी से जूझ रहे हों, या फिर बस एक खालीपन सा महसूस हो... लेकिन कितनी ज़रूरी है ये शुद्धि। यहाँ एक साधारण पर मज़बूत विचार है: आज 1,000 बार 'अस्तग़फिरुल्लाह' कहने का संकल्प लें। इसे किसी काम की तरह न लें; बल्कि इसे एक नई शुरुआत समझें, ख़ासकर इस बरकत वाले महीने में। इसे अपने हिसाब से तोड़ लें-शायद फज्र के बाद 100 बार, अपने रास्ते में 200 बार, या दिन भर के काम करते हुए धीरे से दोहराते रहें। जब भारी लगे, बेचैनी हो, या बस खोया हुआ महसूस कर रहे हों, तब इसे कहें। हमारे प्यारे नबी ﷺ दिन में 70 बार से भी ज़्यादा माफी माँगा करते थे, और वो तो बिल्कुल निर्दोष थे। सोचिए, हमें इसकी कितनी ज़रूरत है! अल्लाह कुरआन में हमें याद दिलाता है कि हम उससे माफी माँगें, जिसके वादे हैं और बरकतें, आसानी और नए मौके। क्या हो अगर जिस बदलाव के लिए आप दुआ कर रहे हैं, वो आपके इस्तिग़फार से शुरू हो? अगर आप तैयार हैं, तो बस कहें 'मैं साथ हूँ।' और जब पूरा कर लें, तो 'हो गया' लिखकर बताएँ। चलो एक-दूसरे को प्रेरित करते रहें! 1,000 इस्तिग़फार। आज। आपसे हो जाएगा! अल्लाह इस रमज़ान में आपके लिए इसे बरकतों का साधन बनाए। 🌙🕊️