शुक्रवार की याद: हज़ारों दुरूद भेजने से मिलते हैं अनगिनत सवाब
अस्सलामु अलैकुम, सभी को! जुमुआ फिर से आ गया है, अल्हम्दुलिल्लाह। आज एक पल निकालकर हमारे प्यारे नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर दरूद-ए-पाक भेजें-एक हजार बार। एक ख़ूबसूरत हदीस है जिसमें नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: 'जो शख़्स मुझ पर एक बार दरूद भेजता है, अल्लाह उस पर दस बार रहमत नाज़िल फ़रमाता है।' (सहीह मुस्लिम) एक दूसरी रिवायत में है: 'जो मुझ पर दरूद भेजता है, अल्लाह उस पर दस बार रहमत नाज़िल करता है, उसके दस गुनाह मिटा देता है और उसे दस दर्जे ऊपर उठा देता है।' (अहमद, नसाई और हाकिम) और एक उत्साहवर्धक रिपोर्ट भी है-हालांकि कुछ उलेमा ने इसकी सनद को कमज़ोर बताया है-अनस इब्न मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से, जिसमें कहा गया है: 'जो शुक्रवार के दिन मुझ पर एक हज़ार बार दरूद भेजेगा, वह अपनी जन्नत में जगह देखे बिना नहीं मरेगा।' ये एक आसान सा दरूद है जो मैं अक्सर पढ़ता हूँ: अरबी: اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَآلِهِ أَلْفَ أَلْفَ مَرَّةٍ मतलब: 'ऐ अल्लाह, मुहम्मद और उनके परिवार पर हज़ार-हज़ार बार दरूद व सलाम नाज़िल फ़रमा।' अल्लाह हमारी मेहनत कुबूल फ़रमाए और हमारा सवाब बढ़ाए। जज़ाकुम अल्लाहु खैरन!