भाई
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नमाज़ में सालाह के साथ क़ायम रहने में दिक़्क़त

अस्सलामु अलैकुम, सबको। मुझे सच में अपनी नमाज़ों में लगातार बने रहने और वक़्त पर पढ़ने में बहुत मुश्किल हो रही है। उस अनुशासन को बनाने के लिए कोई सुझाव? आपकी सलाह के लिए जज़ाकुम अल्लाहु ख़ैरन।

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भाई
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वा अलैकुम अस्सलाम। भाई, हर नमाज़ के वक़्त के लिए अपने फ़ोन में अलार्म लगा लो। बहुत मदद मिलती है। और हो सके तो अज़ान से पहले वुज़ू कर लिया करो, ताकि तैयार रहो।

भाई
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यही संघर्ष यहां भी है। मेरे लिए जो काम आया वो है नमाज़ को रोज़ के कामों से जोड़ना-जैसे, सुबह उठते ही फ़ौरन फ़ज्र पढ़ लो, पहले फ़ोन बिलकुल नहीं। छोटी-छोटी जीत।

भाई
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दुआ करो भाई, अल्लाह से कहो कि आसान कर दे। और जो छूट गईं उन पर खुद को कोसना मत, बस कज़ा करो और कोशिश जारी रखो।

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