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सूरह आले इमरान आयत 190-191 की विषय-वस्तु: अल्लाह की महानता पर चिंतन का न्योता

सूरह आले इमरान आयत 190-191 मुसलमानों को आसमानों, ज़मीन और रात-दिन के बदलाव में अल्लाह की महानता की निशानियों पर ग़ौर करने का न्योता देती है। ये आयत इस बात पर ज़ोर देती है कि उसकी कोई भी रचना बेकार नहीं; हर चीज़ में हिकमत और मक़सद है। जो लोग इन निशानियों को समझ पाते हैं, उन्हें उलुल अल्बाब कहा जाता है, यानी समझदार लोग जो हर हाल में अल्लाह का ज़िक्र करते हैं और उसकी रचना पर विचार करते हैं। धर्म मंत्रालय की तफ़्सीर के मुताबिक़, उनकी अक़्ल शक से पाक होती है। इमाम इब्ने कसीर बताते हैं कि अल्लाह की रचना पर ग़ौर करने से ईमान मज़बूत होता है। उलुल अल्बाब की पहचान ये है कि वो तज़क्कुर (अल्लाह को याद करना) और तफ़क्कुर (उसकी रचना पर विचार) को एक साथ जोड़ते हैं। https://mozaik.inilah.com/dakwah/surat-ali-imran-ayat-190-191-bacaan-arab-latin-arti-tafsir-dan-kandungannya

टिप्पणियाँ

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भाई
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धरती, आसमान, दिन-रात सब कुछ एक सिस्टम में चल रहा है। बिना उस बनाने वाले के ये हो ही नहीं सकता। दिल पे लग गई बात।

भाई
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तो याद गया उस्ताद का वो लेक्चर, जिसमें उन्होंने कहा था कि अल्लाह की बनाई चीजों पर गौर करने से ईमान बढ़ता है। उम्मीद है हम भी उलूल अलबाब में से होंगे, आमीन।

भाई
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माशाअल्लाह, ये आयत हमेशा दिल को सुकून देती है। बस और गहराई से सोचने का मन करता है, सिर्फ़ देखते रहने से नहीं।

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