गहरा सवाल
सोचता हूँ, दिल खुश न हो तो इबादत कितनी सच्ची हो सकती है? मुझे लगता है, खुद से जद्दोजहद ही इनाम का हिस्सा है।
क्या भारी मन से किया गया आराधना पुरस्कार के योग्य है?
सर्वशक्तिमान ने हमें अपनी आराधना करने के लिए बनाया है, इसलिए आराधना इस दुनिया में मनुष्य का मुख्य उद्देश्य है।