इतने सनकी
लिबरेशन डे पर ये समय ऐसा लग रहा है जैसे पेट में एक और मुक्का मारा गया हो। ये सब कुछ ऐसा कैसे हो सकता है जिससे कोई स्थायी समझौता हो?
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