प्रार्थना और माफ़ी माँगने का सबसे अच्छा समय: अरफ़ाह के रोज़े की नीयत और इसकी 11 ख़ासियतें
इस साल अरफ़ाह का दिन मंगलवार, 26 मई 2026 / 9 ज़ुलहिज्जा 1447 हिजरी को पड़ रहा है। इस्लाम में यह दिन सबसे ख़ास दिनों में से एक है। मुसलमानों को ख़ास तौर पर उनके लिए जो हज पर नहीं हैं, सुन्नत रोज़ा रखने की सलाह दी जाती है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: "अरफ़ाह का रोज़ा पिछले एक साल और आने वाले एक साल के गुनाहों को मिटा देता है" (मुस्लिम)। अरफ़ाह के रोज़े की नीयत रात को पढ़ी जाती है: "नवैतु सौमा ग़दिन अन अदाइ सुन्नति अरफ़हा लिल्लाहि तआला।"
अरफ़ाह के दिन की ख़ासियतों में शामिल हैं: इस्लाम धर्म की पूर्णता का दिन (सूरह अल-माइदा: 3), अल्लाह की तरफ़ से बुज़ुर्गी वाला दिन (सूरह अल-बुरूज: 3), हुरमत वाले महीनों में शामिल (सूरह अत-तौबा: 36), हज के महीने का हिस्सा (सूरह अल-बक़रह: 197), और गुनाहों की माफ़ी तथा दोज़ख़ से रिहाई का दिन (मुस्लिम)। यह दिन दुआ के लिए भी बहुत क़बूलियत वाला वक़्त है, जैसा कि रसूलुल्लाह ने फ़रमाया: "सबसे बेहतरीन दुआ अरफ़ाह के दिन की दुआ है।"
रोज़े के अलावा, मुसलमानों को ज़्यादा से ज़्यादा ज़िक्र, क़ुरआन पढ़ने, सदक़ा और दुआ करने की सलाह दी जाती है। यह मौक़ा अल्लाह तआला से माफ़ी और बरकत पाने का बहुत बड़ा मौक़ा है। (*)
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