शोलावत वक्तु सहर: बोल, उत्पत्ति और नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जन्म का अर्थ
शोलावत वक्तु सहर अल्लाह तआला की प्रशंसा का एक रूप है जिसे विशेष रूप से नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जन्मोत्सव के लिए रचा गया है। इस शोलावत की रचना इंडोनेशिया के प्रसिद्ध विद्वान स्वर्गीय हबीब हसन बिन जाफ़र अस्सेगाफ़ ने की थी। आधुनिक युग में, अनिसा रहमान, ऐ खदीजा और सबयान गंबूस (निस्सा सबयान) जैसे धार्मिक गायकों और संगीतकारों द्वारा इसे फिर से प्रस्तुत करने के बाद यह शोलावत और अधिक लोकप्रिय हो गया है।
शोलावत वक्तु सहर के बोल अरबी पाठ, लैटिन उच्चारण और इंडोनेशियाई अनुवाद में उपलब्ध हैं। इसके शेर ब्रह्मांड की उस खुशी का वर्णन करते हैं जो नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के जन्म का स्वागत करती है, जैसे कि गाते हुए पक्षी और चमकता सूरज। फ़रिश्ते प्रशंसा करते हैं और स्वर्ग की हूरें खुशी से स्वागत करती हैं।
इस शोलावत का गहरा संदेश यह है कि नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का जन्म पूर्ण आनंद के साथ मनाया जाता है और इसे बुराई के पतन का क्षण माना जाता है। उनकी उपस्थिति को पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ा उपहार बताया गया है।
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