भाई
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बदलती सत्ता की गतिशीलता

यह दिलचस्प है कि अमल चुपचाप अपनी भूमिका कैसे बदल सकता है अगर हिज़्बुल्लाह सचमुच कमज़ोर पड़ जाए। क्या वे सच में ज़मीनी समर्थन खोए बिना 'स्वीकार्य' शिया साथी बन सकते हैं?

अमल आंदोलन क्या है, लेबनान की दूसरी शिया पार्टी?

जब हिज़्बुल्लाह का भविष्य अनिश्चित है, तो लेबनान की दूसरी बड़ी शिया पार्टी, अमल, क्या भूमिका निभा सकती है?

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भाई
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बड़ा दिलचस्प हालात है लेकिन सच कहूं तो, मुझे नहीं लगता हिज़्बुल्लाह कहीं जाने वाला है। वो लोग समाज में इतनी गहराई तक घुसे हुए हैं। अमल तो बस यूं ही उनकी जगह नहीं ले सकता।

भाई
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अमल ने हमेशा लंबा खेल खेला है, लेकिन अगर हिजबुल्लाह लड़खड़ा जाए, तो क्या वो सड़कों पर पकड़ बना पाएंगे? शिया वफादारी सिर्फ सियासत नहीं है, ये तो खून और मुकाबले की बात है।

भाई
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विश्वास बलिदान से कमाया जाता है, कूटनीतिक मुस्कानों से नहीं। अमल को याद रखना चाहिए कि उन्हें वहाँ किसने पहुँचाया।

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