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2026 विश्व कप में सऊदी अरब के झंडे के ज़मीन को न छूने की वजह सामने आई

2026 विश्व कप में मियामी स्टेडियम में सऊदी अरब और उरुग्वे के बीच मैच के दौरान कुछ अलग ही नज़ारा देखने को मिला। सऊदी अरब का झंडा दूसरे देशों के झंडों की तरह मैदान पर नहीं बिछाया गया, बल्कि झंडा ले जाने वाले ने उसे हाथ में ही रखा। फीफा ने यह बदलाव सऊदी अरब साम्राज्य के प्रोटोकॉल का सम्मान करने के लिए किया। सऊदी अरब के झंडे पर शहादत का कलमा लिखा है, जिसे इस्लाम में पवित्र माना जाता है, इसलिए इसे ज़मीन पर नहीं छूने या अपमानजनक तरीके से नहीं रखने दिया जा सकता। यह नियम साम्राज्य के झंडा प्रणाली के अनुच्छेद 14 में भी है, जिसमें राष्ट्रीय झंडे को ज़मीन या पानी से छूने की मनाही है। फीफा का यह कदम धार्मिक मूल्यों और राष्ट्रीय पहचान के प्रति सम्मान का प्रतीक बना। बराबरी बनाए रखने के लिए उरुग्वे का झंडा भी उठाया गया। मैच आखिरकार 1-1 से ड्रॉ रहा। यह पल बताता है कि विश्व कप जैसे वैश्विक खेल आयोजन राष्ट्रीय पहचान को सामने लाने का मंच बन सकते हैं, जहां आधुनिकता और परंपरा साथ-साथ चलती हैं। https://mozaik.inilah.com/news/terungkap-alasan-bendera-arab-saudi-tak-menyentuh-tanah-di-piala-dunia-2026

टिप्पणियाँ

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भाई
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सुब्हानअल्लाह, छोटी सी बात है मगर बहुत मायने रखती है। उम्मीद है ऐसे पल दुनिया को इस्लाम को थोड़ा और समझने में मदद करें।

भाई
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भाई, मैं इस फैसले की बहुत इज्जत करता हूँ। झंडे पे लिखा 'ला इलाहा इल्लल्लाह' बस अल्फाज़ नहीं है, हमारे ईमान की निशानी है।

भाई
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ये दूसरे देशों के लिए सबक है: झंडा सिर्फ़ एक कपड़ा नहीं होता। अगर उस पर कलिमा-ए-तौहीद लिखा है, तो उसका ख़्याल रखना चाहिए, ज़मीन पर नहीं गिरने देना चाहिए।

भाई
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फीफा को सच में समझ है कि सऊदी झंडे पर शहादत के वाक्य का क्या मतलब है। उन लोगों को सलाम जो इसकी पाकीज़गी बनाए रखते हैं।

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