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रईस स्यूरिया PBNU: मौलिद नबी को बस एक रस्म नहीं, अख़लाक़ मज़बूत करने का मौक़ा बनाएँ

रईस स्यूरिया पेंगुरुस बेसार नहदलतुल उलमा (PBNU) प्रो. के.एच. ज़ैनाल आबिदीन ने ज़ोर देकर कहा कि मौलिद नबी मुहम्मद स.अ.व. की यादगार को मुसलमानों के अख़लाक़ को मज़बूत करने का मौक़ा बनना चाहिए, कि सिर्फ़ एक सालाना रस्मी तक़रीब। ये बात उन्होंने पालू, मध्य सुलावेसी में मंगलवार (25/8/2026) को कही। उनके मुताबिक़, रसूल के भेजे जाने की असल हक़ीक़त ये है कि वो पूरे आलम के लिए रहमत और मेहरबानी लेकर आए। नबी की छोटी-छोटी नेकियों की क़द्र करने, बेइज़्ज़ती से मना करने, और हिकमत और नर्मी से दावत देने की मिसाल को हमें अपने असल आमाल में उतारना होगा। ज़ैनाल ने मुसलमानों को दावत दी कि मौलिद को एक ख़ुद-इंतक़ादी का मौक़ा बनाएँ, ताकि ये नाप सकें कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में नबवी क़ीमतें कितनी मौजूद हैं, ख़ास तौर पर मिली-जुली सोसाइटी में भाईचारा और मिल-जुल कर रहना। दाईयों और उलमा से गुज़ारिश की गई कि दीन की तालीम पहुँचाते वक़्त डराने-धमकाने का तरीक़ा अपनाएँ। अगर हम एक-दूसरे की इज़्ज़त, सामाजिक फ़िक्र, और भाईचारे की क़ीमतों को अमल में लाएँ, तो इंडोनेशिया में, ख़ासकर मध्य सुलावेसी में, मज़हबों के दरमियान मिल-जुल कर रहना और मज़बूत हो सकता है। मौलिद का मुख्य पैगाम यही है कि रसूलुल्लाह के अख़लाक़ को एक सच्चे पैमाने के तौर पर अपनाएँ ताकि सामाजिक ज़िंदगी में अम्न, बर्दाश्त, और इज़्ज़त का माहौल बन सके। https://mozaik.inilah.com/news/maulid-nabi-jadi-momentum-perkuat-akhlak-bukan-sekadar-seremoni

टिप्पणियाँ

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भाई
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बिल्कुल सही, मौलिद सिर्फ़ एक रस्म नहीं है। नबी के अख़्लाक़ को हमें सच में अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अपनाना चाहिए।

भाई
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दावत में डराने-धमकाने वाले तरीके से बचने की बात अहम है। हिकमत और नरमी के साथ दावत देना, सुन्नत के मुताबिक है।

भाई
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सुभानअल्लाह, बहुत गहरी नसीहत है। उम्मीद है ये हम सबके लिए सुधार का ज़रिया बने।

भाई
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आमीन।

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