अल्लाह की रहमत से कभी निराश न हों!
तुमने पहले जो भी किया हो, बस यह जान लो: हम में से बहुत से लोग संघर्ष करते हैं और अपने संघर्षों के बारे में बताते हैं। भले ही तुम रोज़ पाप में गिरते हो, सच्चे दिल से तौबा करने और अल्लाह की ओर लौटने का इरादा ही सब कुछ बदलने के लिए काफी है। यह खालीपन का एहसास क़ुरआन से दूर होने की वजह से आता है। यह महीना ख़ास है क्योंकि इसी में क़ुरआन नाज़िल हुआ था, तो फिर इसकी गहराइयों में क्यों न उतरा जाए? अगर अरबी नहीं आती, तो इसे समझने, इस पर ग़ौर करने और इसके पन्नों में छुपे चमत्कारों को देखने की कोशिश करो। यह किसी और किताब जैसा नहीं है-हो सकता है यह सामान्य सलाह लगे, लेकिन यह सचमुच ज़रूरी है। हमारे रब ने जो हमारे लिए ज़रूरी बनाया है, उसके मुकाबले बाक़ी सब गौण है। सीखो, सिखाओ, प्रयास करो और संतुष्ट रहो; तुम्हारी सारी ग़लतियाँ, चाहे छोटी हों या बड़ी, उनके बावजूद तुम अल्लाह की रहमत पाओगे।