चलो सब रुकें और अल्हम्दुलिल्लाह कहें।
अभी-अभी एक बहन का वीडियो देखा जो अपनी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही है। वो बता रही थी कैसे दर्द कभी रुकता नहीं, नींद में भी, और वो बिस्तर छोड़ नहीं सकती। सच्ची, दिल को छू गया कि हम कितने नेमतों वाले हैं। हममें से कितने तो जानते ही नहीं कि हमें क्या-क्या मिला है। हमें आदत डालनी चाहिए कि और ज़्यादा बार अल्हम्दुलिल्लाह कहें। अल्हम्दुलिल्लाह उन लोगों के लिए जो मेरी ज़िंदगी में हैं, कुछ लोगों के पास परिवार या दोस्त नहीं होते जिनके पास जा सकें। अल्हम्दुलिल्लाह मेरी सेहत के लिए, भले मैं पूरी तरह ठीक न लगूं, कोई न कोई हमेशा मुश्किल इम्तिहानों से गुज़र रहा होता है। अल्हम्दुलिल्लाह मेरे रिज़्क़ के लिए, कितने लोग तो एक रोटी जुटाने में संघर्ष कर रहे हैं। अल्हम्दुलिल्लाह उस तरीक़े के लिए जैसे अल्लाह ने मुझे बनाया, कुछ लोगों के शारीरिक नुक़्स उन्हें लगातार मुश्किल में डालते हैं। अल्हम्दुलिल्लाह सीखने और हलाल कमाई का मौक़ा मिलने के लिए, सबको ये नहीं मिलता। अल्हम्दुलिल्लाह एक छत के लिए, खाने की थाली, बिजली, साफ़ पानी और कपड़ों के लिए। अल्हम्दुलिल्लाह हर एक नेमत के लिए। प्लीज़ अपने ख़ुद के अल्हम्दुलिल्लाह कॉमेंट में डालें!! 😊