30 जुलाई विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस: जागरूकता बढ़ाने और पीड़ितों की सुरक्षा का मौका
हर साल 30 जुलाई को, दुनिया विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस मनाती है, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने 2013 में संकल्प A/RES/68/192 के ज़रिए स्थापित किया था। इस दिवस का मकसद मानव तस्करी के खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा को बढ़ावा देना है। मानव तस्करी एक अंतरराष्ट्रीय अपराध है जो मानवाधिकारों का हनन करता है, जिसमें विभिन्न पृष्ठभूमियों के पीड़ित शोषण, आधुनिक गुलामी या हिंसा का शिकार होते हैं।
यह स्मरणोत्सव 2010 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा पारित 'व्यक्तियों की तस्करी से निपटने के लिए वैश्विक कार्य योजना' से शुरू हुआ, जो देशों से रोकथाम और पीड़ित संरक्षण में सहयोग मज़बूत करने का आह्वान करती है। UNODC का 2026 का थीम, "Trapped Behind the Scam", ऑनलाइन धोखाधड़ी के ज़रिए मानव तस्करी के नए तरीकों पर प्रकाश डालता है, जहाँ पीड़ितों को साइबर अपराध नेटवर्क में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।
मानव तस्करी के उन्मूलन के लिए समाज के सभी तत्वों की भागीदारी ज़रूरी है, जिसमें शिक्षा और संदिग्ध नौकरी के प्रस्तावों के प्रति सतर्कता शामिल है। इंडोनेशिया में, यह प्रयास मानव तस्करी अपराध उन्मूलन पर कानून संख्या 21/2007 द्वारा समर्थित है, जो अपराधियों के लिए दंड और पीड़ितों के लिए सुरक्षा व पुनर्वास का प्रावधान करता है।
यह दिवस इस बात पर ज़ोर देता है कि मानव तस्करी सिर्फ एक आपराधिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
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