क्या इस्लाम में रात की नमाज़ (इशा) को देर से पढ़ना ठीक है?
मेरी मर्ज़ी से नहीं, बल्कि एक पारिवारिक समस्या की वजह से घर लौटना सुरक्षित नहीं था, इसलिए मैंने अपनी गाड़ी में ही अस्र और मग़रिब की नमाज़ें पढ़ीं। क्योंकि मेरे पास हिजाब नहीं था, मैंने जैसे-तैसे नमाज़ में अपने जैकेट के हुड को कसकर पहन लिया और बाँहों के कपड़ों को नीचे कर लिया। फिर बात यहाँ तक आ गयी कि हमारी गाड़ी भी ख़राब हो गयी। अब मैं सोच रही हूँ कि क्या इस्लाम में इशा की नमाज़ बाद में पढ़ना जायज़ है, या फिर मुझे अस्र से नमाज़ दोबारा पढ़नी चाहिए? मैंने न तो अबाया पहनी थी और न ही मेरे पास नमाज़ के लिए कोई सही पोशाक थी। मुझे लगता है कि मैं पहले अस्र और मग़रिब की क़ज़ा करूँगी, और फिर हमेशा की तरह इशा की नमाज़ अदा करूँगी।