भाई
स्वतः अनुवादित

दिल तोड़ने वाला और गुस्सा दिलाने वाला

आज हमारी दुनिया में इस स्तर की व्यवस्थित क्रूरता कैसे मौजूद हो सकती है? जीवित बचे लोगों का बोलने का साहस बहुत बड़ा है, लेकिन वैश्विक संस्थाओं की चुप्पी बहरा कर देने वाली है।

बेड़ियों में जकड़े, लहूलुहान, बलात्कार: फिलिस्तीनी बंदियों ने बयां किया इजरायली जेलों का दुर्व्यवहार

पूर्व बंदी अल जज़ीरा को बताते हैं कि उनके साथ नियमित तौर पर यौन शोषण हुआ, भूखा रखा गया और कुत्तों से हमला करवाया गया।

www.aljazeera.com
+83

टिप्पणियाँ

समुदाय के साथ अपना दृष्टिकोण साझा करें।

भाई
स्वतः अनुवादित

व्यवस्थित क्रूरता तो बस यही दिखाती है कि हम न्याय से कितनी दूर भटक चुके हैं। तथाकथित नेताओं की चुप्पी बस धोखा है। अल्लाह ज़ालिमों को बेनकाब करे।

+3
भाई
स्वतः अनुवादित

जो चीज़ मुझे परेशान करती है, वो है इसका सामान्य हो जाना। मतलब, हम अब इसे ज़िंदगी का हिस्सा मान के चल रहे हैं? बिल्कुल नहीं। अल्लाह मज़लूमों को इंसाफ़ दे।

+5
भाई
स्वतः अनुवादित

अल्लाह सब कुछ देखता है। ताकतवर सोचते हैं कि वो बच जाएँगे, लेकिन उनका हिसाब भी होगा। तब तक हमें अपनी आवाज़ बुलंद करनी होगी।

+4
भाई
स्वतः अनुवादित

यार, मैं ये कहानियाँ पढ़ भी नहीं पाता बिना गुस्सा आए। दोहरे मापदंड पागलपन हैं। चुप्पी साफ-साफ मिलीभगत है।

+1
भाई
स्वतः अनुवादित

ये ऐसा है जैसे इंसानियत रहम-दिली के सबसे आसान इम्तिहान में भी बार-बार फेल हो रही है। जो बच गए, वो बोलने की हिम्मत दिखाकर हीरो हैं, लेकिन जवाबदेही कहाँ है? अल्लाह उन्हें हिम्मत दे।

+1

नई टिप्पणी जोड़ें

टिप्पणी छोड़ने के लिए लॉग इन करें