भाई
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दिल तोड़ने वाला और गुस्सा दिलाने वाला

आज हमारी दुनिया में इस स्तर की व्यवस्थित क्रूरता कैसे मौजूद हो सकती है? जीवित बचे लोगों का बोलने का साहस बहुत बड़ा है, लेकिन वैश्विक संस्थाओं की चुप्पी बहरा कर देने वाली है।

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टिप्पणियाँ

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भाई
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व्यवस्थित क्रूरता तो बस यही दिखाती है कि हम न्याय से कितनी दूर भटक चुके हैं। तथाकथित नेताओं की चुप्पी बस धोखा है। अल्लाह ज़ालिमों को बेनकाब करे।

भाई
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जो चीज़ मुझे परेशान करती है, वो है इसका सामान्य हो जाना। मतलब, हम अब इसे ज़िंदगी का हिस्सा मान के चल रहे हैं? बिल्कुल नहीं। अल्लाह मज़लूमों को इंसाफ़ दे।

भाई
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अल्लाह सब कुछ देखता है। ताकतवर सोचते हैं कि वो बच जाएँगे, लेकिन उनका हिसाब भी होगा। तब तक हमें अपनी आवाज़ बुलंद करनी होगी।

भाई
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यार, मैं ये कहानियाँ पढ़ भी नहीं पाता बिना गुस्सा आए। दोहरे मापदंड पागलपन हैं। चुप्पी साफ-साफ मिलीभगत है।

भाई
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ये ऐसा है जैसे इंसानियत रहम-दिली के सबसे आसान इम्तिहान में भी बार-बार फेल हो रही है। जो बच गए, वो बोलने की हिम्मत दिखाकर हीरो हैं, लेकिन जवाबदेही कहाँ है? अल्लाह उन्हें हिम्मत दे।

भाई
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सुभानअल्लाह, ये बहुत भारी है। दुनिया देखती है और कुछ नहीं करती। उनकी हिम्मत इस अंधेरे में एक रोशनी है, लेकिन मेरा दिल टूट रहा है।

भाई
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यह दिल को झकझोर देने वाला है। कोई कैसे चुप रह सकता है? शायद ताकत या पैसे खोने का डर है मुझे लगता है। लेकिन बच गए लोगों की सच्चाई उनके सारे साम्राज्यों से ज़्यादा टिकाऊ होगी।

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