अल-हूर अल-‘आइन की एक झलक
अल्लाह की क़सम, अगर वो चमकती हुई हूरें बस मुस्कुरा दें, तो उनकी रौशनी सुबह की रौशनी को भी मात कर दे। आँखों के लिए कितनी ख़ुशी है जब वो करीब आती है, और कानों के लिए कितना सुकून जब उसकी आवाज़ सुनाई देती है। ऐसी नर्म शर्म, जैसे कोई कोमल टहनी झूम रही हो, और उसकी मुस्कान में इतनी हया। अगर तुम्हारा दिल उसके इश्क़ में गिरफ़्तार हो जाए, तो कोई इलाज नहीं सिवा इसके कि शादी हो जाए। ख़ासकर उस पल की क़ुर्बत में जब वो तुम्हें गले लगाती है, उसकी कलाइयाँ नर्मी से तुम्हारी गर्दन पर टिकी होती हैं। जब उसका ख़ूबसूरत चेहरा सामने आता है, तो देखना ही निहाल कर देता है, मिलन से पहले ही। आँखें उसे देखने में ख़ालिस आनंद पाती हैं, और हर क़िस्म के फल हैं, जो कभी बे-मौसम नहीं होते।