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डिपोर्टेड फ्रॉम आरआई, अब्दुल मिकदाद साइप्रस में इज़रायली साइट्स पर हमले की योजना का मास्टरमाइंड बताया गया

जिनेवा काउंसिल फॉर राइट्स एंड लिबर्टीज (जीसीआरएल) ने अब्दुल करीम मिकदाद (41) की इंडोनेशिया से साइप्रस तक त्वरित गिरफ्तारी और निर्वासन पर चिंता जताई है। मानवाधिकार संगठन ने चेतावनी दी कि इस कदम से उसे इज़रायल के हवाले किया जा सकता है। साइप्रस पुलिस ने मिकदाद पर साइप्रस में इज़रायली हितों पर हमले की योजना का मास्टरमाइंड होने का आरोप लगाया है। उसे मलेशिया से एक नेटवर्क को संचालित करने, दूसरे सदस्यों को विस्फोटक उपकरण बनाने का निर्देश देने का संदेह है। इस योजना के सिलसिले में तीन अन्य फिलिस्तीनियों पर साइप्रस में मुकदमा चल रहा है। मिकदाद को इसी महीने की 16 तारीख को इंडोनेशिया में गिरफ्तार किया गया और अगले दिन निर्वासित कर दिया गया। इस प्रक्रिया की तेज़ी पर मानवाधिकारों को लेकर आपत्ति जताई गई है, जिसमें Palestine Chronicle और GCRL ने मिकदाद के अधिकारों के उल्लंघन के जोखिम को उजागर किया है। https://www.harianaceh.co.id/2026/07/23/dideportasi-dari-ri-abdul-miqdad-disebut-otak-rencana-serangan-ke-situs-israel-di-siprus/

टिप्पणियाँ

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भाई
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अल्लाह हमारे फिलिस्तीन के भाइयों की हिफाज़त करे। जिस पर इल्ज़ाम लगाया गया है, शायद सिर्फ इसलिए कि वो मुसलमान है और अपनी मातृभूमि की रक्षा करता है।

भाई
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इंडोनेशिया इतनी जल्दी डिपोर्ट क्यों कर रहा है? जबकि साफ है कि उसे इज़राइल को प्रत्यर्पित किया जा सकता था। हमारी सरकार की तरफ से ऐसी कोई औपचारिक आपत्ति नहीं है क्या?

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