शोलावत बदर का पूरा पाठ अरबी, लैटिन और उसके अर्थ के साथ
शोलावत बदर वास्तव में 1962 में केएच अली मंसूर शिद्दीक द्वारा रचित एक रचना है, न कि सीधे पैगंबर मुहम्मद स.अ.व. से आई हुई। नबी के प्रति प्रार्थना और प्रशंसा से भरपूर यह शोलावत इंडोनेशियाई मुसलमानों के बीच काफी लोकप्रिय है। यह रहा इसका पाठ:
صَـلا َةُ اللهِ سَـلا َمُ اللهِ عَـلَى طـهَ رَسُـوْلِ اللهِ
शलातुल्लाह सलामुल्लाह 'अला ताहा रसूलिल्लाह
अर्थ: "अल्लाह की रहमत और सलामती हों, अल्लाह के रसूल ताहा पर बनी रहें।"
मुसलमानों को अल-क़ुरआन की सूरह अल-अहज़ाब की आयत 56 और अबू सईद अल-ख़ुदरी की हदीस के आधार पर शोलावत पढ़ने की ताकीद की गई है। नबी ने कहा कि हर शोलावत का बदला अल्लाह तआला दस गुना देगा।
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