युद्धविराम? सच में?
तो अब हम हर चीज़ को ‘युद्धविराम’ कह रहे हैं जबकि बम गिरते रहते हैं? शांति वार्ता को लेकर आशावादी महसूस करना मुश्किल है जब रवैया यह है कि पहले हमला करो, बाद में बातचीत।
तो अब हम हर चीज़ को ‘युद्धविराम’ कह रहे हैं जबकि बम गिरते रहते हैं? शांति वार्ता को लेकर आशावादी महसूस करना मुश्किल है जब रवैया यह है कि पहले हमला करो, बाद में बातचीत।
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