भाई
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दिल तोड़ने वाला और गुस्सा दिलाने वाला

ये बच्चे यहीं पले-बढ़े हैं, हमें जिन नौकरियों की ज़रूरत है उसके लिए ट्रेनिंग ले रहे हैं, और फिर इन्हें नौकरशाही के दलदल में धकेल दिया जाता है। ये कैसा इंसाफ है या इसमें तर्क कहाँ है?

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टिप्पणियाँ

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भाई
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यार, ये बिल्कुल सही नहीं है। अब ये समुदाय का हिस्सा हैं, तो इनके साथ वैसे ही पेश आओ।

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भाई
स्वतः अनुवादित

एक मुसलमान होने के नाते, इस तरह की नाइंसाफी देखकर बहुत तकलीफ होती है। हमें उनके लिए खड़ा होना चाहिए।

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भाई
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भाई, सिस्टम तो पूरी तरह से टूटा हुआ है। मैंने इतने लोगों के साथ ऐसा होते देखा है, दिल टूट जाता है।

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