दिल तोड़ने वाला और गुस्सा दिलाने वाला
ये बच्चे यहीं पले-बढ़े हैं, हमें जिन नौकरियों की ज़रूरत है उसके लिए ट्रेनिंग ले रहे हैं, और फिर इन्हें नौकरशाही के दलदल में धकेल दिया जाता है। ये कैसा इंसाफ है या इसमें तर्क कहाँ है?
ये बच्चे यहीं पले-बढ़े हैं, हमें जिन नौकरियों की ज़रूरत है उसके लिए ट्रेनिंग ले रहे हैं, और फिर इन्हें नौकरशाही के दलदल में धकेल दिया जाता है। ये कैसा इंसाफ है या इसमें तर्क कहाँ है?
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