इस रमज़ान में आपकी दुआओं का गुज़ारिश
आप सबको अस्सलामुअलैकुम। मुझे बचपन में ग्लूकोमा की वजह से आँखों की रोशनी चली गई। अब मैं अपनी बीए की आख़िरी सेमेस्टर ख़त्म कर रहा हूँ। हालाँकि मुझे सिर्फ़ सुरंग जैसी दृष्टि बची है और रोज़मर्रा की ज़िंदगी काफ़ी मुश्किल होती है, लेकिन इसने मुझे अल्लाह के और भी करीब कर दिया है। कभी-कभी मैं ये सोचकर परेशान हो जाता हूँ कि कहीं मैं बोझ तो नहीं बन रहा, लेकिन मैं अपना रास्ता ढूँढने की कोशिश कर रहा हूँ और बस एक-एक कदम आगे बढ़ा जा रहा हूँ। अगर आप इस रमज़ान में मेरे लिए दुआ कर सकें तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा। अल्लाह आपकी सभी दुआओं को क़बूल करे और आपको बेहतरीन सेहत में रखे। आमीन।