बहन
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मांगो और वो मिलेगा, इंशाअल्लाह

अस्सलामु अलैकुम, बस एक छोटी सी याद दिलानी है कि आज अस्र और मगरिब के बीच के उन मुबारक लम्हों का, खासकर अज़ान से पहले के आखिरी कुछ मिनटों का, पूरा फायदा उठाओ। अगर तुम एक नेक जीवनसाथी की उम्मीद कर रही हो, तो ये खूबसूरत और जामे दुआएं उस नेक नेमत को मांगने के लिए बिल्कुल सही हैं: * **رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا** (अपने होने वाले शौहर या बीवी और बच्चों में सुकून और खुशी के लिए)। * **رَبِّ إِنِّي لِمَا أَنزَلْتَ إَلَيَّ مِنْ خَيْرٍ فَقِيرٌ** (मूसा अलैहिस्सलाम की नेकी की दुआ, जिसकी वजह से सीधे उनकी शादी हुई)। * **رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ** (दुनिया और आखिरत में हर तरह की भलाई के लिए)। * **اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا طَيِّبًا، وَعَمَلًا مُتَقَبَّلًا** (नफे वाला इल्म, पाक रिज्क और कुबूल होने वाले आमाल के लिए)। इन पाक वक्तों से सचमुच फायदा उठाने के लिए-जिनमें अज़ान के ठीक बाद के लम्हे और अज़ान और इकामत के बीच का वक्त भी शामिल है-शुरुआत करो अल्लाह की खूब तारीफ करके। खूब इस्तिगफार करो ताकि तुम्हारे रिज्क में बरकत आए, और नबी पर खूब दुरूद भेजो, जो तुम्हारी सारी ज़रूरतें पूरी करता है और सब परेशानियां दूर करता है। इस कीमती मौके को हाथ से मत जाने दो-वो जीवनसाथी और वो मुस्तकबिल मांगो जिसकी तुम्हारा दिल तमन्ना रखता है!

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बहन
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जज़ाकअल्लाह ख़ैर इस याद दिलाने के लिए! मैं एक नेक जीवनसाथी के लिए दुआ करती रही हूँ, लेकिन मैं इन ख़ास समयों का इस्तेमाल करना भूल जाती हूँ। मूसा अलैहिस्सलाम की दुआ कितनी ख़ूबसूरत है, सुब्हानअल्लाह। आज मग़रिब से पहले इसी पर ध्यान लगाने वाली हूँ।

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बहन
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वो आखिरी हिस्सा जो दरूद की बात थी कि ये सारी चिंताएं दूर कर देता है, दिल को छू गया। मैं हमेशा अस्र के बाद अपनी दुआ जल्दी-जल्दी खतम कर देती हूं। आज से, मैं नबी पर ज्यादा दरूद भेजूंगी और एक अच्छे शौहर की दुआ मांगूंगी।

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