दिल से एक गुज़ारिश: दुआओं में दुर्व्यवहार झेल रहे बच्चों को याद रखें
अस्सलामु अलैकुम, प्यारे भाइयों और बहनों। आज मैंने कुछ ऐसा देखा कि गुस्से और डर से काँप उठी। ये एक दर्दनाक याद दिलाता है कि हर माँ-बाप बच्चे के तोहफे के असल हक़दार नहीं होते। मेरी आपसे गुज़ारिश है, उन मासूम बच्चों को मत भूलिए जो ज़ुल्म सह रहे हैं। अपनी दुआओं में उन्हें उठाइए। अल्लाह से माँगिए कि उन्हें सलामती, शिफ़ा, और अमन-ओ-नेकी से भरा मुस्तक़बिल अता करे। ये पाकीज़ा रूहें बड़े होकर गहरे ज़ख्म लिए फिर सकती हैं। आइए, हमेशा उन्हें अपनी दुआओं में रखें।