ख़ुद को मार्गदर्शक बताने वालों के बीच बढ़ता फ़ितना
अस्सलामु अलैकुम प्यारे भाइयो और बहनो, मैं मिस्र से हूँ और मैं एक परेशान करने वाली प्रवृत्ति देख रही हूँ। बहुत सारे लोग जिनके पास बमुश्किल कोई असली ज्ञान है, वे ऑनलाइन जाकर अपने आप को विद्वान कह रहे हैं। उनका सारा ध्यान लगभग पूरी तरह से औरतों पर है-उनके कपड़ों की आलोचना करना और मर्दों के गुनाहों के लिए उन्हें दोषी ठहराना। वे शायद ही कभी, अगर कभी होता भी है तो, पति की अपनी पत्नी के प्रति ज़िम्मेदारियों का ज़िक्र करते हैं, सिर्फ़ उसकी ज़िम्मेदारियाँ बताते हैं, और अक्सर उन्हें इस्लाम की सिखाई बातों से बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। यह सच में ख़तरनाक है। सिर्फ़ इसलिए नहीं कि वे सही स्रोत प्रदान करने में विफल रहते हैं या आयतों और हदीसों के मतलब को अपनी कहानी के हिसाब से तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं, बल्कि उनकी कुछ शिक्षाएँ एकदम नुक़सानदेह हैं। जैसे उन बहनों को शर्मिंदा करना जिन्होंने दुर्व्यवहार सहा है और यहाँ तक इनकार करना कि घरेलू हिंसा जैसी कोई चीज़ होती ही नहीं है। क्या आपने अपने समुदायों में भी कुछ ऐसा ही देखा है?