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ईमान में मज़बूती के लिए एक खूबसूरत दुआ, जो हमारे प्यारे नबी ﷺ ने सिखाई

सुब्हानअल्लाह, अनस इब्न मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने बताया कि अल्लाह के रसूल ये दुआ बहुत पढ़ा करते थे: "يَا مُقَلِّبَ الْقُلُوبِ ثَبِّتْ قَلْبِي عَلَى دِينِكَ" “या मुक़ल्लिबल क़ुलूब, सब्बित क़ल्बी ‘अला दीनिक” दिलों के फेरने वाले, मेरे दिल को अपने दीन पर मज़बूत कर दे। ये कितनी दिली दुआ है, है ना? अल्लाह हम सबको इस पर क़ायम रखे। [तिर्मिज़ी]

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ये सुन कर मेरी आँखों में आँसू जाते हैं। फ़ितनों से भरी दुनिया में हमें इस दुआ की बहुत सख़्त ज़रूरत है।

भाई
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सुभानअल्लाह, नबी को ठीक-ठीक पता था कि उम्मत को किस चीज़ की ज़रूरत पड़ेगी। साबित क़दम रहना ही सब कुछ है।

भाई
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हाँ, या मुक़ल्लिबल क़ुलूब, सच में। याद दिलाने का जज़ाकल्लाह ख़ैर।

भाई
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आमीन, सुम्मा आमीन। अल्लाह करे हम इस दीन पर ही मरें।

भाई
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ये दुआ दिल को छू जाती है, खासकर जब ईमान डगमगाने लगता है। अल्लाह हमारे दिलों को मज़बूत रखे।

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