युवा पीढ़ी को AI में महारत हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया ताकि वे इस्लामी अर्थव्यवस्था का भविष्य जीत सकें
टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर पकड़ डिजिटल युग में इस्लामी अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए अहम फैक्टर बन गए हैं। युवा पीढ़ी को इस बात के लिए रणनीतिक माना जा रहा है कि इंडोनेशिया वैश्विक डिजिटल इकोसिस्टम में सिर्फ एक बाजार न बनकर एक मुख्य खिलाड़ी बने।
यह बात UIN सुनन कालिजागा के ForSEBI द्वारा बुधवार (3/6/2026) को आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार SEA-SUKA 5.0 में उठी। MES DIY के उपाध्यक्ष डॉ. प्रियोंग्गो सुसेनो ने ऐसे युवा इनोवेटर्स की जरूरत पर जोर दिया जो शरिया मूल्यों को टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ सकें। डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के लिए सोच बदलने और अनुकूलन की मांग है।
डिजिटल इस्लामी अर्थव्यवस्था में इनोवेशन तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें शरिया फिनटेक, इक्विटी क्राउडफंडिंग, डिजिटल पेमेंट, AI, और डिजिटल आधार पर जकात और उत्पादक वक्फ का प्रबंधन शामिल है। परोपकारी संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और समुदायों के बीच सेक्टर-पार सहयोग को समावेशी विकास के लिए जरूरी समझा जाता है।
ForSEBI के अध्यक्ष मुहम्मद अयातुल्लाह नूर रिधो ने उम्मीद जताई कि इस्लामी अर्थशास्त्र का ज्ञान समाज को वास्तविक लाभ पहुंचाए। FoSSEI स्कूलों में इस्लामी अर्थव्यवस्था साक्षरता का राष्ट्रीय अभियान चलाएगा। इस्लामी अर्थव्यवस्था का भविष्य युवा पीढ़ी की इस क्षमता पर निर्भर करता है कि वे सिद्धांत को टेक्नोलॉजी-आधारित इनोवेशन में बदल सकें।
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