जब मुझे एहसास हुआ कि सुख की तलाश मेरा पुराना धर्म था, इस्लाम ने मुझे शांति दी
नास्तिकता नहीं, ईसाई धर्म नहीं, यहूदी धर्म नहीं, हिंदू धर्म नहीं-इस्लाम से पहले मेरा रास्ता बस यूं ही जो भी अच्छा लगे उसके पीछे भागना था, बिना सोचे-समझे। अल्हम्दुलिल्लाह, धर्म बदलने के बाद, मुझे आख़िरकार वह आंतरिक शांति मिल गई जो मुझसे छूट रही थी। यह कितना आश्चर्यजनक है कि कितने लोग उसी तरह जी रहे हैं बिना यह समझे कि कुछ और गहरा भी है।